कंपनी को रजिस्टर कैसे करे

How register company in India बिजनेस शुरु करने से पहले लोग काफी सोच-विचार करते हैं। व्यवसाय के घाटे-मुनाफे को सोचने से पहले रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस बनवाने को लेकर कशमकश में रहते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ जरुरी कार्यवाहियों को पूरा करना होता है। इसके बाद ही आप अपना व्यवसाय शुरु कर सकते हैं। क्या है वो जरुरी कार्य, तो चलिए हम आपकी टेंशन को कम किए देते हैं। आपको बताते है उन जरुरी कार्यवाहियों के विषय में जिन्हें आपको व्यवसाय खोलने से पहले पूरा करना होता है।

दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं जो है इंडिया में अपनी कंपनी कैसे रजिस्टर करें ( how register company in India ) और कानूनी तरीके से अपना बिज़नेस कैसे सुरु ( How start business in India ) करें।

दोस्तों हमारे आपके सबके दिमाग मैं बहुत सारे बिज़नेस करने के आईडिया आते रहते हैं और बहुत सारे तो ऐसे होते हैं जिन्हे सुरु करना बड़ा ही आसान होता है लेकिन एक काम जिसमे हर सुरुवाती उद्यमी को परेशानी आती है वो है उसको करने का सही तरीका और सही कानूनी प्रक्रिया जिसको सोचते ही हम लोग अटक जाते हैं।

दोस्तों जितना महत्वपूर्ण बिज़नेस को करते समय आपको अपने मुनाफे पर देना पड़ता है उतना ही महत्वपूर्ण है अपने बिज़नेस को कानूनी तरीके से चलाना , कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना ताकि हम आगे चल कर किसी कानूनी पचड़े में न फंस जाएं। साथ साथ ये भी ध्यान देने वाली बात है कि बिना कानूनी प्रिक्रिया पूरी करे हमे किसी भी तरह की सरकारी मदद जिसे कि लोन , सब्सिडी आदि भी नहीं मिल सकती।

इसलिए कोई भी बिज़नेस सुरु करने में ये बहुत महत्वपूर्ण है और जरूरी है कि हम अपना बिज़नेस कानूनी तरीके से रजिस्टर करके ही करें। तो चलिए आपको इसकी पूरी जानकारी देते हैं ताकि आप जान सकें कि बिज़नेस रजिस्ट्रेशन की क्या प्रक्रिया हैं।

How register company in India

कंपनी क्या है (What is a Company)

कुछ चुने हुए प्रशिक्षित अधिकारी जब एक संगठन को मिलकर चलाते हैं, तो वह एक कंपनी बन जाती है. कंपनी में मौजूद शेयरधारकों द्वारा सामान बेचने व खरीदने के लिए या फिर सेवाओं का आदान प्रदान करने के लिए उस कंपनी का निर्माण किया जाता है. कुछ कंपनियां लाभकारी संगठन से जुड़ी होती है और कुछ कंपनियां गैर-लाभकारी संगठन के लिए भी कार्य करती हैं. एक अकेला इंसान किसी भी कंपनी को नहीं चला सकता है, उसे उस कंपनी को चलाने के लिए कई सारे श्रमिकों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए वे कई लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं. कंपनियों को हक होता है, कि वे दूसरी कंपनियों के शेयर खरीद कर उन्हें अपने नाम कर सकती हैं व जरूरत पड़ने पर दूसरी कंपनियों पर मुकदमा भी कर सकती हैं. इसके अतिरिक्त एक कंपनी अपनी पूंजी वृद्धि के लिए बाजार से पैसा उधार भी लेती है व अपने शेयर बेच कर पैसे इकट्ठा भी करती है. यदि कानूनी रूप से देखा जाए, तो सभी प्रकार की कंपनियों के पास समान अधिकार व जिम्मेदारियां होती हैं. साथ ही उनके पास जिम्मेदारी के तौर पर कुछ कानूनी नियम भी होते हैं, जिनका अनुसरण करना उनके लिए अनिवार्य होता है. यदि कोई भी कंपनी कानून के बनाए हुए नियमों का उल्लंघन करती है, तो वे उनके लिए दंडनीय अपराध होता है.

दोस्तों अब बात करते हैं एक जरूरी चीज की जो है सबसे पहले ये जानना कि आप का बिज़नेस प्लान क्या है आप कैसा बिज़नेस करना चाहते है, आपका टर्नओवर कितना होगा , आप कहाँ कहाँ अपनी सेवाएँ दोगे या व्यापार करोगे। क्योकि इसी बात पर निर्भर करता है कि आप कैसी कंपनी रजिस्टर करोगे। हमारे देश में सामान्यतः दो तरीके से बिज़नेस होता है

  • लाइसेंस या परमिट ले कर ( नॉन रजिस्टर्ड कंपनी )
    • प्रोप्राइटरी बिज़नेस ( Proprietary Firm )
    • पार्टनरशिप बिज़नेस ( Partnership Firm )
  • कंपनी रजिस्टर करके ( रजिस्टर्ड कंपनी )
    • पर्सन कंपनी ( One Person Company )
    • लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी ( Limited Liability Company )
    • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ( Private Limited Company )
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ( Private Limited Company )

अब आप सोचें , अगर आप अकेले या कुछ लोग मिल कर कोई छोटा लोकल बिज़नेस करना चाहते हैं जिसे कि दूकान खोलना , होटल रेस्टोरेंट खोलना , कोचिंग सेंटर खोलना, छोटा मैन्युफैक्चरिंग का काम करना , कोई चीज जिसे मुर्गी पालन, डेरी आदि या फिर ऐसा ही कोई छोटा बिज़नेस करना जिसमे आपकी सर्विसेज अधिकतर अपने शहर या राज्य में ही रहेंगी तो फिर आपके लिए सबसे अच्छा है प्रोप्राइटरी या पार्टनरशिप बिज़नेस करना, लेकिन अगर आपका प्लान बड़ा है और उसमे आपको बिज़नेस चलाने के लिए बहुत सारे फंड, लोन , इन्वेस्टर आदि की जरूरत पड़ेगी तो फिर आपको एक रजिस्टर्ड कंपनी बना कर बिज़नेस करना चाहिए।

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कंपनी के प्रकार (Types of Company)

आमतौर पर कंपनी के कई सारे प्रकार होते हैं, जो निम्नलिखित है :-

एकल व्यक्ति कंपनी (One Person Company) :-

एक कंपनी सदस्यों के आधार पर भी बनाई जाती है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोग अपना व्यवसाय आरंभ करने की ही सोच रहे होते हैं, पर उस समय उनके पास उपयुक्त पूंजी नहीं होती है. ऐसे में वे अकेले ही युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई कंपनी का अविष्कार करते हैं और अपने व्यवसाय को धीरे-धीरे बढ़ावा देते हैं.

निजी कंपनी (Private Limited Company):-

निजी कंपनी वह कंपनी होती है, जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति कंपनी अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड हो जाते हैं और एक अपनी अलग से कंपनी बनाते हैं. वे एक व्यवसाय निर्धारित कर लेते हैं और उससे जुड़ी सभी प्रशिक्षित वस्तुओं के बारे में जानकर एक कंपनी का आरंभ कर देते हैं.

सार्वजनिक कंपनी (Public Limited Company):-

एक ऐसी कंपनी जो कानूनी वस्तुओं के साथ न्यूनतम 7 सदस्यों की संख्या द्वारा बनाई जाती है, उसे सार्वजनिक कंपनी कहते हैं. इस कंपनी में अधिकतम सदस्यों की कोई सीमा नहीं होती है, क्योंकि यह एक पंजीकृत कंपनी होती है. इस कंपनी को अपने शेयर स्वतंत्र रूप से बेचने व खरीदने की पूरी छूट होती है. कोई भी व्यक्ति जब सार्वजनिक कंपनी से जुड़ जाता है, तो वह भी सार्वजनिक कंपनी के अंतर्गत आ जाता है.

साझेदार कंपनी (Limited Liability partnership) :-

एक कंपनी ऐसी होती है जो कुछ साझेदारों द्वारा आरंभ की जाती है और चलाई भी जाती है. किसी भी कंपनी को चलाने के लिए 2 या उससे अधिक साझेदार उस कंपनी के मालिकाना हक को पाने के हकदार होते हैं.

रजिस्टर्ड कंपनी के लाभ
• ई वाणिज्य व्यवसाय की तरह वैश्विक मंच पर अपने व्यापार को बढ़ाने के अधिक अवसर
• उधार लेने के अधिक विकल्पों की उपलब्धता हैं, विशेष रूप से एमएसएमई रजिस्ट्रेंट के लिए (लघु और मध्यम पैमाने के कारोबार पर)
• नियार्त बढ़ाने के अवसर यहां होते हैं लेकिन इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड लेने की जरूरत
• राजस्व प्राधिकरण के दंड और अभियोजन पक्ष की कार्यवाही से राहत।
• अपने अनन्य व्यापार को पेटेंट करवाएं

प्रोप्राइटरी बिज़नेस और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बिज़नेस की तुलना – Compare proprietor business and private limited company

चलिए प्रोप्राइटरी बिज़नेस और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बिज़नेस की कुछ तुलना करके आपको दोनों के फायदे और नुकसान बता दें ताकि आप सही निर्णय ले सको।

  • बिज़नेस प्लान – अगर आपका बिज़नेस प्लान छोटा और लोकल है तो प्रोप्राइटरी बिज़नेस करें और अगर आपका प्लान बड़ा राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय है तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलें
  • ओनरशिप – अगर आप अकेले बिज़नेस करना चाहते हैं तो प्रोप्राइटरी बिज़नेस करें प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए कम से कम दो लोग डायरेक्टर बनाने पड़ते हैं।
  • खर्चा – अगर आपको इन्वेस्टर , लोन और पूँजी की सहायता चाहिए तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलें और अगर आप अपनी पूँजी लगा रहे हैं या किसी सरकारी स्कीम से आपको फायदा हो सकता है तो प्रोप्राइटरी बिज़नेस करें।
  • रजिस्ट्रेशन – प्रोप्राइटरी बिज़नेस में रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं पड़ती सिर्फ आपको अपने बिज़नेस के लिए सही लाइसेंस , परमिट आदि लेने पड़ते हैं जो आप नगर निगम, नगर पालिका या राज्य के श्रम विभाग से ले सकते हैं। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए आपको कंपनी को MCA में रजिस्टर करना पड़ता है।
  • कंपनी का नाम – प्रोप्राइटरी बिज़नेस में आप नाम अपने हिसाब से रख सकते हैं एक ही नाम के बहुत सारे प्रोप्राइटरी बिज़नेस हो सकते हैं किन्तु प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम के लिए आपको अप्लाई करना पड़ता है और अगर नाम उपलब्ध होगा तो ही आपको मिलेगा अगर कोई पहले से उस नाम की कंपनी रजिस्टर है तो वो नाम आपको नहीं मिलेगा।
  • जिम्मेदारी – प्रोप्राइटरी बिज़नेस की सारी लेन देन , मुनाफा नुकसान की जिम्मेदारी आपकी होगी इसमें फायदा भी पूरा आपका होगा और अगर कोई नुकसान हुआ तो आपको पूरा उठाना पड़ेगा मतलब आपकी निजी सम्पति भी जप्त हो सकती है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की अलग पहचान होती है और इसमें फायदा नुकसान कंपनी का होता है आपकी निजी संपति ज्यादातर मामलों में सुरक्षित रहती है। आपकी कमाई शेयर , सैलरी या बोनस के रूप में होती है।
  • बाहरी निवेश – प्रोप्राइटरी बिज़नेस में कोई दूसरा निवेश नहीं कर सकता जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कोई भी निवेश कर सकता है। कंपनी किसी से भी अपने फंड जुटा सकती है।
  • लोन की सुविधा – प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लोन आसानी से मिल जाता है लेकिन प्रोप्राइटरी बिज़नेस को सरकारी बैंकों से लोन मिलने में परेशानी हो सकती है, हाँ ये जरूर है कि सरकार कि कोई स्कीम से आप फायदा ले सकते हैं ।
  • कंपनी की वैधता – प्रोप्राइटरी बिज़नेस क्योकि स्वामित्व का मॉडल है तो बिज़नेस की वैधता भी तब तक है जब तक मालिक जिन्दा है , उसके बाद प्रोप्राइटरी बिज़नेस प्रॉपर्टी की तरह वसीहत के माध्यम से ट्रांसफर होता है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अपना अस्तित्व होता है इसमें एक से ज्यादा डायरेक्टर होते हैं और नए डायरेक्टर अप्पोइंट होते रहते हैं और कंपनी चलती रहती है।
  • संचालन और कंप्लायंस – प्रोप्राइटरी बिज़नेस में कोई ज्यादा कंप्लायंस नहीं होता इसमें बस आपको सही समय पर अपना लाइसेंस , परमिट आदि रिन्यू करना होता है उनके हिसाब से बिज़नेस चलना पड़ता है लेनदेन का खाता मैंटेन करना पड़ता है , सही समय पर GST भरना पड़ता है और अपना Income Tax भरना पड़ता है। जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कंप्लायंस और प्रोसीजर काफी जटिल हैं जिसमे आपको बोर्ड मीटिंग लेनी पड़ती है और उन्हें फाइल करना पड़ता है , आपको अपना बिज़नेस चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट करा कर एनुअल रिटर्न फाइल करना पड़ता है।
दोस्तों ध्यान दें अगर आप सोच रहे हैं कि बाद में आप प्रोप्राइटरी बिज़नेस को प्राइवेट लिमिटेड या प्राइवेट लिमिटेड को प्रोप्राइटरी बिज़नेस में बदल सकते हैं तो ये संभव नहीं है। इसलिए निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार कर लें। 

अपने बिज़नेस या कंपनी का नाम तय करें – Decide Name of Business or Company

तो दोस्तों बिज़नेस रजिस्टर करने में सबसे पहला काम है अपनी कंपनी या बिज़नेस का नाम तय करना। जैसे आपका नाम है और सारे लोग आपको उसी नाम से जानते पुकारते हैं ठीक उसी तरह सबसे पहले आपके बिज़नेस का नाम जरूरी है जिसके साथ आप अपने बिज़नेस की पहचान बना सकें। ये आपके ऊपर है कि आप अपने बिज़नेस का क्या नाम रखें लेकिन आपको नाम तय करते समय कुछ चीजों का जरूर ध्यान रखना चाहिए जैसे कि

  • नाम छोटा रखें जिसको आसानी से बोला जा सके और जो लोगों के दिमाग और जुबान पर आसानी से चढ़ जाए।
  • ऐसा नाम न रखें जिस नाम की या जिससे मिलते जुलते नाम की पहले से ही कोई कंपनी हो।
  • नाम में ऐसे शब्दों का प्रयोग न करें जो गलत हो , भ्रामक हो या गैर कानूनी हो।
  • आजकल डिजिटल का जमाना है तो नाम तय करते समय ये जरूर ध्यान रखें की उसका वेबसाइट डोमेन नाम ( website domain name ) उपलब्ध हो और आप उसे अपने लिए खरीद लें। अगर नहीं तो मिलता जुलता ही ले लें या फिर दूसरा नाम सोचें।

ये था पहला स्टेप जिसमे आपको अपने बिज़नेस का नाम तय करना है।

कंपनी रजिस्ट्रेशन कैसे करें – How to do company registration in India

चार्टर्ड अकाउंटेंट की सहायता से – दोस्तों अब तक आप जान चुके होंगे कि आपको किस तरह के बिज़नेस करने की जरूरत होगी तो सबसे अच्छा ये है कि आप अपनी पहचान के किसी अच्छे चार्टर्ड अकाउंटेंट से मिलें या आपके आसपास आपके शहर में काफी कंपनी होंगी जो कंपनी रजिस्ट्रेशन का काम करती हैं उनके द्वारा आप आसानी से अपना बिज़नेस रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं , और भविष्य के बाकी के काम जैसे GST भरना , Income टैक्स भरना , या किसी भी तरह की फाइलिंग करना आदि काम भी उनको दे सकते हैं।

स्वयं करें ऑनलाइन आवेदन – इसके अलावा अगर आप सारा प्रोसीजर खुद करना चाहते हैं तो भी आप खुद कर सकते हैं इसके लिए अब सारी चीजें ऑनलाइन हो गई हैं।

  • आप प्रोप्राइटरी बिज़नेस के लिए अपने नगर निगम, नगर पालिका या राज्य के श्रम विभाग की वेबसाइट पर जा कर उसका फॉर्म भर सकते हैं और अप्लाई कर सकते हैं इसके लिए आपको लगेगा
    • आधार कार्ड
    • PAN कार्ड
    • बिज़नेस का एड्रेस प्रूफ ( रेंट एग्रीमेंट या बिजली का बिल )
    • बिज़नेस लाइसेंस या मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस की शर्तों के हिसाब से आपका सेटअप जिसका सम्बंधित अधिकारी निरीक्षण करेगा और फिर आपको लाइसेंस या परमिट मिलेगा।
  • अगर आप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलना चाहते हैं तो आप Ministry Of Corporate Affairs (MCA) की वेबसाइट www.mca.gov.in पर जा कर भी अप्लाई कर सकते हैं जहाँ का प्रोसीजर है
    • सबसे पहले MCA की वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाएं और फिर इस अकाउंट से आगे का काम करें।
    • सभी डायरेक्टर को DIN ( डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर ) के लिए ऑनलाइन MCA की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा जिसमे उनका आधार कार्ड , PAN कार्ड और एड्रेस प्रूफ जरूरी है।
    • भारत सरकार के द्वारा अधिकृत संगठन जैसे- ई-मुद्रा, सिफ़ी से हर डायरेक्टर को Digital Signature लेने होंगे।
    • फिर MCA की वेबसाइट पर जाए और चेक करे की कंपनी नाम उपलब्ध है या नहीं अगर है तो नाम के लिए अप्लाई करें और उसी समय रिज़र्व कर लें।
    • अब Private Limited Company Registration Form भरना होगा। www.mca.gov.in की वेबसाइट पर जाकर लॉग इन करे। फिर E-form 1A भरना है। इसके साथ फ़ीस जमा करके डिजिटल सिग्नेचर करे।
    • अब MOA और AOA ड्राफ्ट करें। इसके बाद कंपनी को Service Request Number से Form 1 सबमिट करना है, इसके लिए वेबसाइट पर लॉग इन करे और MOA और AOA सबमिट करे।
    • कंपनी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करें और बिज़नेस शुरू करें।
तो दोस्तों उम्मीद करते हैं ये पोस्ट आपके काम आया होगा , हो सकता है कुछ बातें छूट गई हों या पूरी तरह समझ न आई हों, या कुछ नियम बदल गए है हों इसलिए हमारा परामर्श है आप अन्य जगहों से भी जानकारी जुटाएं और सबसे बढ़िया यही है कि आप चाहे प्रोप्राइटरी बिज़नेस करना चाहते हों या प्राइवेट लिमिटेड बिज़नेस इस रजिस्ट्रेशन के काम के लिए प्रोफेशनल चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद लें वो ज्यादा अच्छा रहेगा। 

आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ , धन्यवाद।

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