बनारस-काशी संकुल परियोजना क्या है | What is Vanarasi- Kaashi Sankul Project

उत्तर प्रदेश में हमारे देश की 16 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। उत्तर प्रदेश के लोगों के आर्थिक विकास के लिए कृषि और कृषि से जुड़े कार्यों पर भी निर्भर है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश ने डेयरी क्षेत्र में देश का सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य का मुकाम हासिल किया है। जिससे भारत भी दुनिया का पहला ऐसा देश बना है। जहां सबसे अधिक दूध का उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश में डेयरी उद्योग के नए निर्माण तथा इस प्रकार के अवसरों को देखते हुए बनारस में डेयरी से जुड़ी एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत की गई है। यह परियोजना क्या है? बनारस -काशी परियोजना मेंं दुग्ध उत्पादकों को लाभ किस तरह मिलेगा? इस प्रकार की संपूर्ण विस्तृत जानकारी मेरे द्वारा आपको इस लेख में बताई जाएगी। अतः इस लेख को अंत तक पढ़ें।

बनारस काशी संकुल परियोजना क्या है

भारत में लगभग दुनिया का 22 परसेंट दूध का उत्पादन होता है इसमें उत्तर प्रदेश की भागीदारी सबसे ज्यादा है। सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के के किसानों का कृषि पर से बोझ कम करने तथा उनकी आय को बढ़ाने के लिए पशुपालन तथा अन्य उपाय द्वारा उनकी आय बढ़ाने का कार्य करने जा रही है। इसी कड़ी में 23 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने वाराणसी में अमूल की बनास काशी संकुल परियोजना की आधारशिला रखी। इस योजना के माध्यम से किसानों से पशुपालन करवाया जाएगा इससे जो दूध निकलेगा वह उसे निकट के अमूल प्लांट में बेच सकेंगे। जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही पशुओं के गोबर का इस्तेमाल वह गोबर बायोगैस में कर सकेंगे। इसके लिए सरकार द्वारा पास में ही रामनगर में भारत का सबसे बड़ा गोबर बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट में गोबर बेचकर किसान अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।

बनारस काशी संकुल परियोजना डेयरी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना है। जिसके अंतर्गत दूध का उत्पादन किया जाएगा। यह परियोजना बनारस से लगभग 32 किलोमीटर दूरी पर पिंडरा ब्लाक का करखियांव गांव मे नींव रखी गई है। बनारस काशी संकुल परियोजना का प्रमुख उद्देश्य पूर्वांचल में रोजगार और वहां के किसानों की आय को दोगुना करना है। तथा डेयरी प्लांट से जुड़ी इस परियोजना की कुल लागत 475 करोड़ रुपए हैं। पिंडरा ब्लाक की करखियांव गांव के लगभग 120 किलोमीटर क्षेत्र में आने वाले किसानों को लाभ प्राप्त होगा।

इसके साथ ही इस क्षेत्र में दूध को रखने के लिए चिलिंग सेंटर खुलेगा। बनारस काशी संकुल परियोजना मे कंपनी द्वारा हर गांव में दूध कलेक्शन सेंटर खोले जाएंगे। तथा हर गांव में दुग्ध क्रय समिति बनाए जाने की भी योजना है। जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेस के तहत दूध को खरीदेगी और निर्धारित समय पर कंपनी की गाड़ी से दूध का कलेक्शन किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से प्रतिदिन 5 लाख लीटर दूध का उत्पादन किया जाएगा।

बनारस काशी संकुल परियोजना का उद्देश्य

आजादी के 70 साल बाद भी भारतीय किसानों की आर्थिक हालात बहुत ही दयनीय स्थिति में हैं। कृषि में पर्याप्त फायदा न होने के कारण किसान काफी परेशान हैं तथा उनकी कृषि से आय निरंतर कम होती जा रही है। ऐसे में किसानों की आय को बढ़ाने के लिए तथा प्रदेश के किसानों के आर्थिक हालात सुधारने के लिए सरकार द्वारा किसानों को पशुपालन से जोड़कर दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर उनकी आय को बढ़ाना है। पशुपालन से वह दूध बेचकर अपनी आमदनी को काफी बढ़ा सकते हैं। किसानों को दूध बेचने के लिए कोई समस्या ना हो इसके लिए उनके गांवों के नजदीक अमूल बनारस काशी संकुल परियोजना की नींव रखी गई है। इसमें कंपनी द्वारा गांव गांव जाकर दूध का कलेक्शन करके डेयरी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा

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बनारस-काशी संकुल परियोजना से लाभ कैसे प्राप्त होगा

बनारस-काशी संकुल परियोजना के तहत डेयरी प्लांट का निर्माण होने के बाद किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बनारस-काशी संकुल पर योजना के लाभ इस प्रकार हैं।

  • बनारस-काशी संकुल परियोजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा जिससे किसानों एवं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा पशुपालन की वजह से किसानों की कृषि पर भी निर्भरता कम होगी जिससे देश की जीडीपी में कृषि का योगदान बढ़ेगा।
  • बनारस काशी संकुल योजना के तहत डेयरी प्लांट के निर्माण होने के बाद यहां के स्थानीय उत्पादकों को दूध का उचित मूल्य दिया जाएगा जिससे दुग्ध उत्पादको ( किसान, छोटे डेयरी प्लांट ) की आय में बढ़ोतरी होगी जिससे वह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर होंगे।
  • बनारस-काशी संकुल परियोजना से डेयरी क्षेत्र से जुड़े उत्पाद( पनीर, बटर मिल्क, आइसक्रीम) को बढ़ावा मिलेगा।
  • बनारस काशी संकुल परियोजना के तहत वाराणसी, चंदौली, भदोही, गाजीपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़ आदि जिलों के हजारों गांवों को इस परियोजना का लाभ मिलेगा।
  • बनारस-काशी संकुल परियोजना के तहत डेरी प्लांट में दूध के अतिरिक्त आइसक्रीम, पनीर, खोवा, घी मक्खन का उत्पादन किया जाएगा।
  • इस परियोजना से डेयरी प्लांट में अत्याधुनिक मशीनों से दूध का उत्पादन किया जाएगा आने वाले कुछ समय में बेहतर नस्ल के पशुओं के लिए कृतिम गर्भाधान की भी व्यवस्था की जाएगी जिससे अधिक से अधिक दूध का उत्पादन किया जा सके।
  • बनारस -काशी संकुल परियोजना के तहत दुग्ध उत्पादकों को उच्च गुणवत्ता वाला पशु आहार उपलब्ध कराया जाएगा जिससे पशुओं की सेहत का अच्छे से ख्याल रखा जा सकेगा और पशु स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेंगे।
  • इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं का पलायन रुकेगा । वह गांव में रहकर भी डेयरी उत्पादों व दूध आदि का उत्पादन कर सकेंगे तथा अपने आप को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान करेंगे।
  • बनारस काशी संकुल परियोजना के माध्यम से शिक्षित ग्रामीण युवा भी डेयरी उत्पादों से संबंधित स्टार्टअप शुरू कर सकता है जिससे देश के युवा वर्ग में स्टार्टअप कल्चर को भी विकसित करने में मदद मिलेगी तथा स्टार्टअप्स की मदद से देश में हजारों रोजगार भी पैदा होंगे।

निष्कर्ष:-

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि बनारस-काशी संकुल परियोजना के तहत डेयरी प्लांट शुरू करने से किसानों की आय बढ़ने के साथ- साथ ग्रामीण युवाओं का पलायन भी रुकेगा। इस परियोजना के माध्यम से वहां के स्थानीय क्षेत्र पर लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। बनारस- काशी संकुल जैसी परियोजना की वजह से हमारा देश दूध के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा तथा देश के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे अतः बनारस काशी संकुल परियोजना जैसी परियोजनाओं को सरकार द्वारा प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे देश का विकास तेजी से हो सके।

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आपके द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर

प्रश्न- बनारस काशी संकुल परियोजना क्या है

उत्तर- बनारस-काशी संकुल परियोजना डेयरी उत्पाद से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना है जिसके अंतर्गत दूध का उत्पादन किया जाएगा।

प्रश्न- बनारस-काशी संकुल परियोजना किस स्थान पर शुरू की जा रही है

उत्तर बनारस काशी संकुल परियोजना, बनारस से लगभग 32 किलोमीटर दूरी पर पिंडरा ब्लाक का करखियांव में। शुरू की जा रही है

प्रश्न- बनारस काशी संकुल परियोजना से कितने जिलों में लाभ प्राप्त होगा

उत्तर- बनारस-काशी संकुल परियोजना वाराणसी, चंदौली, भदोही, गाजीपुर, मिर्जापुर आदि जिलों के साथ-साथ पिंडरा ब्लाक के करखियांव के लगभग 120 किलोमीटर क्षेत्र में आने वाले किसानों को लाभ मिलेगा।

प्रश्न- बनारस-काशी संकुल परियोजना की कुल लागत कितनी है

उत्तर- बनारस-काशी संकुल परियोजना की कुल लागत 475 करोड़ रुपए है

प्रश्न- बनारस-काशी संकुल परियोजना का क्या उद्देश्य है

उत्तर- बनारस-काशी संकुल परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय को बढ़ाना है।

प्रश्न- बनारस काशी संकुल परियोजना में प्रतिदिन कितने लीटर दूध का उत्पादन होगा

उत्तर इस योजना के माध्यम से डेरी प्लांट में प्रतिदिन 5 लाख लीटर दूध का उत्पादन होगा

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