राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने ‘बिजली बिल राहत योजना 2026’ का स्वागत करते हुए नियमित रूप से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं को भी 30 प्रतिशत छूट देने की मांग की है। परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में यह प्रस्ताव दाखिल करते हुए कहा कि योजना का आर्थिक भार ईमानदार उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ना चाहिए।
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बिजली बिल राहत योजना 2026
सरकार की ‘बिजली बिल राहत योजना 2026’ को लेकर राज्य भर में चर्चा तेज हो गई है। इस बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने योजना का स्वागत करते हुए यह मांग की है कि नियमित रूप से बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को भी छूट दी जाए।
यूपी में करीब 1.45 करोड़ बिजली बकायेदारों का 31205 करोड़ रुपये बिजली बिल व 24775 करोड़ रुपये सरचार्ज सहित कुल 55980 करोड़
बकाया है। इसकी वसूली के लिए ऊर्जा विभाग ने बिजली बिल राहत योजना 2005 शुरू की है। इसके लिए तीन चरण में पंजीयन होगा। पहला चरण 1 से 31 दिसंबर 2025, दूसरा चरण एक जनवरी से 31 जनवरी 2026 व तीसरा चरण एक फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलेगा।
इस योजना के तहत एकमुश्त भुगतान पर मूल बिल में 25 फीसदी तक की छूट, किस्तों में भी भुगतान की सुविधा होगी। लेकिन इसके लिए पंजीयन या रजिस्ट्रेशन कराना होगा। उपभोक्ता बिजली विभाग की वेबसाइट यूपीपीसीएल डॉट ओआरजी, विभागीय कार्यालय, जनसेवा केंद्र पर पंजीयन कर सकते हैं। मीटर रीडर अथवा विभागीय कैश काउंटर पर भी पंजीयन करा सकते हैं।
नियमित भुगतानकर्ताओं को 30 प्रतिशत छूट देने की सिफारिश
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मंगलवार को विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व का प्रस्ताव दाखिल किया। उनका कहना है कि जो उपभोक्ता समय पर अपने बिजली बिल चुकाते हैं, उन्हें प्रोत्साहन के रूप में 30 प्रतिशत तक की छूट दी जानी चाहिए।
सब्सिडी की व्यवस्था हो या उपभोक्ताओं पर बोझ न बढ़े
वर्मा ने कहा कि यदि सरकार बिजली कंपनियों को सब्सिडी या वित्तीय सहायता दे रही है तो यह सराहनीय कदम है। मगर यदि सब्सिडी नहीं दी गई तो योजना का बोझ नियमित उपभोक्ताओं पर नहीं आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईमानदार भुगतानकर्ताओं पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक भार डालना अनुचित होगा।
परिषद ने आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि बिजली दरों में वृद्धि के लिए पावर कॉरपोरेशन द्वारा दाखिल प्रस्ताव पर फिलहाल कोई मंजूरी न दी जाए। परिषद का तर्क है कि चुनावी माहौल में लिए गए ऐसे फैसले उपभोक्ता हितों के विपरीत संदेश देते हैं।
नियमित उपभोक्ताओं को राहत के दायरे में लाने की मांग
योजना के तहत एक दिसंबर से शुरू होने वाली छूट फिलहाल केवल बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए लागू होने की संभावना है। परिषद चाहती है कि इस राहत का लाभ उन उपभोक्ताओं को भी दिया जाए जो बिना विलंब के वर्षों से अपने बिल चुकाते आ रहे हैं।
आयोग करेगा विधिक और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा
परिषद का प्रस्ताव अब विद्युत नियामक आयोग के पास विचाराधीन है। आयोग यह समीक्षा करेगा कि योजना के आर्थिक और विधिक पहलुओं को कैसे संतुलित किया जाए ताकि उपभोक्ता हित सुरक्षित रहें और निगम के राजस्व पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
जल्द शुरू हो सकती है सार्वजनिक सुनवाई
संभावना है कि आयोग सभी संबंधित पक्षों उपभोक्ता संगठनों, पावर कॉरपोरेशन और राज्य सरकार से सुझाव मांगते हुए इस पर सार्वजनिक सुनवाई करे। अगर परिषद की सिफारिशों को मंजूरी मिल जाती है, तो नियमित उपभोक्ताओं को भी बिजली बिल राहत योजना 2025 का लाभ मिलने का रास्ता खुल जाएगा।
बिजली बिल राहत योजना 9 पॉइट्स
- 1. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के अनुसार, यदि उपभोक्ता प्रथम चरण में पंजीकृत है और पंजीयन के 30 दिनों में पूरा भुगतान कर देता है तो उसे 25% की छूट मिलेगी।
- 2. अगर वह 31वें दिन भुगतान करता है तो उसे दूसरे चरण की अवधि वाली 20 फीसदी छूट मिलेगी।
- 3. अगर तृतीय चरण की अवधि में भुगतान करता है तो उसे 15 फीसदी की ही छूट मिलेगी। तीसरे चरण की अवधि की समाप्ति तक पूर्ण भुगतान न करने पर उसे डिफॉल्टर माना जाएगा।
- 4. इस तरह अगर वह 28 फरवरी 2026 तक भुगतान नहीं करता है तो डिफॉल्टर हो जाएगा और उसे कोई छूट नहीं मिलेगी। इसके बाद डिफॉल्टर होने तक की अवधि का लंबित भुगतान अधिभार विद्युत बिल में जोड़ दिया जाएगा।
- 5. पुराने बकाए के साथ मासिक बिल के नियमित भुगतान के लिए पंजीयन करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी फॉर्मूला तय किया गया है। अगर कोई उपभोक्ता 750 रुपये मासिक किस्त के रूप में भुगतान करने के लिए पंजीयन करता है तो उस चालू माह के बिल का भी भुगतान करते रहना होगा।
- 6. अगर उसे माह की 15 तारीख तक बिजली बिल नहीं मिलता है तो उसे बकाए के सापेक्ष 750 रुपये के साथ प्रोविजनल बिल का भुगतान माह की 25 तारीख तक करना होगा।
- 7. मासिक प्रोविजनल बिल की राशि की गणना उपभोक्ताओं की श्रेणी के आधार पर होगी। प्रोविजनल बिल और मासिक किस्त में से किसी एक का बकाया रहने पर उसे डिफॉल्ट माना जाएगा। बिल की सूचना उपभोक्ता के पंजीकरण के समय दिए गए मोबाइल नंबर पर एसएमए या व्हाट्सएप के जरिये भेजा जाएगा।
- 8. एक माह जमा न करने पर 50 रुपये, दो माह पर 150 और तीन माह पर 300 रुपये डिफॉल्ट राशि जोड़ी जाएगी। तीन बार के बाद भी जमा नहीं करने पर उसे पूरी तरह से डिफॉल्टर मान लिया जाएगा। ऐसी ही व्यवस्था 500 रुपया प्रतिमाह की किस्त देने वालों के लिए भी बनाई गई है।
- 9. योजना की अवधि में बिल में कोई गड़बड़ी होने पर उसे जांचने की भी व्यवस्था रहेगी। इसके लिए डिस्काम स्तर पर निदेशक (वाणिज्य) के नेतृत्व में विशेष सेल का गठन होगा।