अगर कोई आपसे आपसे लोन का गारंटर बनने को कहे तो क्या करें?

‘रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय. टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाय.’ यह दोहा आपने सुना होगा. कई वजहों से अक्सर करीबी संबंधों में खटास पड़ जाती है. परिवारों में जमीन-जायदाद पर विवाद कोई नई बात नहीं है. वसीयत ठीक से न लिखे जाने पर यह झगड़ा पैदा होता है. जब भाई या बहन आपसे होम या पर्सनल लोन का गारंटर बनने के लिए कहते हैं तो भी समस्या पैदा हो जाती है. वैसे तो इसमें कोई दिक्कत नहीं दिखती है. लेकिन, बैंक की जरूरतों , लोन के विवरण और इससे जुड़ी जटिलताओं को न समझने पर आप बड़ी आर्थिक मुसीबत में पड़ सकते हैं. इसलिए भाई के लोन का गारंटर बनने से पहले कुछ सवाल पूछ लेने चाहिए. कहने का मतलब यह है कि भाई के अनुरोध को न तो सिरे से खारिज कर दें, न ही आंख मूंदकर अपनी सहमति जता दें.

Risks of becoming a loan guarantor

1. क्या होगी आपकी जिम्‍मेदारी?

आपकी जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस तरह के गारंटर हैं. यानी आप फाइनेंशियल गारंटर हैं या नॉन-फाइनेंशियल गारंटर. फाइनेंशियल गारंटर बनने पर लोन की अदायगी का जिम्मा आप पर भी बराबर बनेगा. अगर लोन लेने वाला व्यक्ति डिफॉल्ट करता है तो इसे चुकाने के लिए आप कानूनी रूप से बाध्य होंगे. नॉन-फाइनेंशियल गारंटर बनने पर आपकी भूमिका सिर्फ मध्यस्थ तक सीमित रहती है. आप लोन लेने वाले व्यक्ति और बैंक के बीच संपर्क कराने में पुल का काम करते हैं.

2. भाई की क्रेडिट हिस्ट्री, वित्तीय स्थिति देख लें

बैंक यदि गारंटर के लिए कह रहा है तो आपको अपने भाई की वित्तीय स्थिति और ट्रैक रिकॉर्ड को देख लेना चाहिए. वैसे तो गारंटर के संबंध में हर एक बैंक की अपनी नीति होती है. लेकिन, बैंक अक्सर ऐसा तब करते हैं जब उन्हें बॉरोअर की लोन अदायगी की क्षमता पर संदेह होता है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. मसलन खराब क्रेडिट स्कोर, कमजोर आर्थिक स्थिति या अनियमित इनकम.

3. क्या इससे आपके क्रेडिट स्टेटस पर असर होगा?

जब आप फाइनेंशियल गारंटर बनने का विकल्प चुनते हैं, तो जान लें कि इसका आपके क्रेडिट रिकॉर्ड और लोन स्टेटस पर असर होता है. इसका प्रभाव आप पर भी उतना ही पड़ता है जितना भाई पर होता है. इस तरह अगर आपका भाई लोन की ईएमआई भरने में डिफॉल्ट करता है तो आपके क्रेडिट स्कोर पर भी यह दिखता है. बाद में अगर आपको लोन लेने की जरूरत पड़ती है तो समस्या पैदा हो सकती है.

इसमें लोन की रकम की भी भूमिका होती है. मसलन, अगर आप 30 लाख रुपये के लोन के गारंटर हैं और अपनी इनकम लिमिट के अनुसार 50 लाख रुपये का होम लोन चाहते हैं तो बैंक शायद आपको 20 लाख रुपये का ही लोन दे. इससे न केवल आपका वित्तीय लक्ष्य प्रभावित होता है, बल्कि भाई के साथ संबंध भी बिगड़ते हैं.

4. क्या आप बीच में निकल सकते हैं?

आपको समझना चाहिए कि गारंटर होना लंबी अवधि की प्रतिबद्धता है. होम लोन के मामले में यह 20 साल होती है. आप बीच में ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं. बशर्ते इसके लिए आप बैंक को कोई दूसरा विकल्प दें. अच्छा विकल्प है कि भाई होम लोन ईएमआई इंश्योरेंस ले. इस तरह डिफॉल्ट होने पर ईएमआई की गारंटी बीमा कंपनी पर आती है. डिस्क्लेमर: कॉलम में सुझाव लाइंसेस्ड हेल्थकेयर प्रोफेशनल के नहीं है. कॉलम में सुझावों के नतीजों की जिम्मेदारी ईटी और लेखक की नहीं है.

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