11 बड़े ऐलान, खुशहाल होंगे किसान

खेती के लिए सरकार ने किये 11 बड़े ऐलान, खुशहाल होंगे किसान

PM Modi Government announcement for Kisan : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की तीसरी किस्‍त मुख्‍यतौर पर कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों पर केंद्रित है. कुल 11 ऐलान किये गए हैं. इनमें 8 फैसले कृषि और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से जुड़े हैं. 3 फैसले गवर्नेंस और रिफॉर्म से जुड़े हैं. आत्मनिर्भर भारत पैकेज की तीसरी किस्त में कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों के लिए कुल 1.65 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज की घोषणा की गई .आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

1. कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढ़ांचा के लिए एक लाख करोड़ रुपये वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि क्षेत्र में आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ की योजना पेश की. इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे फंड से कृषि उपज के भंडारण, वैल्यू एडिशन सहित कई तरह की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. प्राइमरी कोऑपरेटिव सोसायटी, स्टार्टअप, किसान उत्पादक संघ सहित कई संगठन इस फंड का लाभ उठा सकेंगे.

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2. छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 10000 करोड़ रुपये वित्त मंत्री ने कहा कि माइक्रो फूड इंटरप्राइज (एमएफई) के लिए 10,000 करोड़ की स्कीम लाई गई है. उन्होंने कहा कि इससे खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत में काम करने वाली छोटी इकाइयों को फायदा होगा. उन्होंने कहा कि बिहार में मखाना, केरल में रागी, कश्मीर में केसर, आंध्र प्रदेश में मिर्च, यूपी में आम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. क्लस्टर बनाकर इन चीजों के उत्पादन से जुड़ी इकाईयां इस फंड का फायदा उठा सकती हैं. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल के लिए वोकल का मकसद भी पूरा होगा. एमएफई के साथ ही इन फसलों से जुड़े किसानों की भी आय बढ़ेगी. ये इकाईयां वेलनेस, न्यूट्रिशनल और सेहत से जुड़े उत्पाद बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी.

3. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए 20 हजार करोड़ रुपये
वित्त मंत्री ने कहा कि 20 हजार करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की घोषणा बजट में की गई की थी. कोरोना की वजह से इसे तत्काल लागू किया जा रहा है. इसमें समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए 12000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. इसके अलावा 9,000 करोड़ रुपये मछली पालन से जुड़े बुनियादी ढांचा को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा. इस योजना के तहत मछुआरों को नई नौकाएं दी जाएंगी. इस योजना से 55 लाख लोग .

4. राष्ट्रीय पशु बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 13,342 करोड़
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ऐसा देश है, जहां सबसे अधिक पशु हैं. उन्होंने कहा कि हम 53 करोड़ पशुओं के टीकाकरण की योजना लेकर आए हैं. इस पर लगभग 13,343 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इससे गाय और भैंसें मुंहपका और खुरपका जैसे रोगों से मुक्त होगी. इससे देश में दूध का उत्पादन बढ़ेगा. साथ ही किसानों की आय भी बढ़ेगी.

5. पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए 15000 करोड़ रुपये का फंड वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार 15,000 करोड़ रुपये का फंड बनाएगी. इसका नाम एनिमल हस्बेंडरी डेवलपमेंट फंड होगा. इससे पशुपालन और डेयरी उत्पादन जैसी गतिविधियो में निजी निवेश आकर्षित किया जाएगा. इससे किसानों की आय बढ़ेगी. इससे कैटल फीड (जानवरों का चारा), मिल्क प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियों को भी लाभ होगा.

6. हर्बल पौधों को बढ़ावा देने के लिए 4000 करोड़
वित्त मंत्री ने कहा कि हर्बल पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 4,000 करोड़ रुपये की योजना सरकार ने तैयार किया है. इन पौधों की दुनियाभर में मांग है. लगभग 10 लाख हेक्टेयर में हर्बल प्रोड्क्टस की खेती होगी. इससे किसानों को अतिरिक्त 5,000 करोड़ की आय होगी. गंगा के किनारे 800 हेक्टेयर भूमि पर हर्बल प्रोडक्ट्स के लिए कॉरिडोर बनाया जाएगा. इससे देश में जन औषिधि को भी बढ़ावा मिलेगा.

7. मधुमक्खी पालकों को 500 करोड़ की मदद वित्त मंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. इससे मधुमक्खी पालन के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा. इससे 2 लाख मधुमक्खी पालकों की आय बढ़ेगी. इससे देश में बड़े पैमाने पर शहद का उत्पादन होगा.

8. ऑपरेशन ग्रीन का विस्तार होगा, टॉप टू टोटल के लिए 500 करोड़
वित्त मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन ग्रीन का विस्तार किया जा रहा है. पहले हमारी टॉप योजना होती थी, जिसके तहत टमाटर, प्याज और आलू आते थे. अब इस योजना के दायरे में बाकी सभी फल और सब्जियां (All fruits and vegetables) भी आएंगी. इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इससे जो खाद्य पदार्थ नष्ट हो जाते थे, उन्हें बचाया जाएगा. इसके अलावा किसानों को दबाव में कम मूल्य पर फसल नहीं बेचनी पड़ेगी. इ .

9. आवश्यक वस्तु अधिनियम में होगा बदलाव कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश बढ़ाने के लिए 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव किया जाएगा. इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी. कई बार फसल के उत्पादन में उतार-चढाव से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. उन्हें कम दाम पर उत्पाद बेचना पड़ता है. नियम में बदलाव के बाद स्टॉक लिमिट का नियम सूखे और बाढ़ जैसी स्थितियों में ही लागू होगा.

10. किसान जहां चाहें वहां बेच सकेंगे फसल किसान को अभी कृषि विपणन मंडी समिति यानी एपीएमसी लाइसेंस धारकों को ही अपना उत्पाद बेचना पड़ता है. किसानों को अपने उत्पाद की सही कीमत मिले और दूसरे राज्यों में जाकर भी उत्पाद बेच सकें उसके लिए कानूनी में बदलाव किया जाएगा. एक केंद्रीय कानून के तहत उन्हें किसी भी राज्य में अपना उत्पाद ले जाकर बेचने की छूट होगी. इससे किसानोंं को उनकी फसल की सही कीमत मिल सकेगी.

11. रुकेगा किसानों का उत्पीड़न किसानों के लिए सुविधाजनक ऐसा कानूनी ढांचा बनाया जाएगा, जिसके तहत उसे निश्चित आमदनी हो. जोखिम रहित खेती के लिए उपाय किए जाएंगे. इसके अलावा फसल की गुणवत्ता का मानकीकरण किया जाएगा. इससे किसानों के जीवन में बदलाव जाएगा. वह बड़े खुदरा व्यापारी, निर्यातकों के साथ पारदर्शिता के साथ काम कर सकेंगे. इससे उनका उत्पीड़न रुकेगा. केंद्र सरकार इसके लिए कानून बनाएगी.

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