Atmanirbhar Bharat Rojgar yojna आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना का एलान, 2 साल तक सरकार भरेगी PF

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड संक्रमण काल से उबर रहे भारत में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को नई योजना की शुरुआत की. इसे आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना नाम दिया गया है.

देश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना का एलान किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि इससे कर्मचारी और रोजगार देने वाले दोनों को ही प्रोत्साहन मिलेगा. इस स्कीम को 1 अक्टूबर 2020 को लागू माना जाएगा और यह योजना 30 जून 2021 तक रहेगी.

ऐसे मिलेगा फायदा सरकार अगले दो साल तक सब्सिडी देगी. जिस संस्था में 1000 तक कर्मचारी हैं, उसमें 12 फीसदी कर्मचारी और 12 फीसदी नियोक्ता हिस्सा केंद्र देगी. 1000 से अधिक कर्मचारियों वाली संस्थाओं में केंद्र कर्मचारी के हिस्से का 12 फीसदी देगा. 65 फीसदी संस्थाएं इसमें कवर हो जाएंगी.

योजना के तहत नई नियुक्तियां करने वाले एंप्लॉयर्स को सब्सिडी दी जाएगी. सब्सिडी इंप्लॉइज और इंप्लॉयर्स द्वारा दो साल के लिए किए गए रिटायरमेंट फंड कॉन्ट्रीब्यूशन यानी PF को कवर करने के लिए होगी. PF में इंप्लॉइज द्वारा किए जाने वाले 12 फीसदी योगदान और एंप्लॉयर द्वारा किए जाने वाले 12 फीसदी योगदान यानी कुल 24 फीसदी योगदान के बराबर सब्सिडी सरकार की ओर से दो साल के लिए एंप्लॉयर्स को दी जाएगी.

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत EPFO में रजिस्टर ऐसा हर एंप्लॉयर, जो नए इंप्लॉइज को नियुक्त कर रहा हो, सब्सिडी का पात्र होगा. इस योजना का लाभ लेने के लिए अधिकतम 50 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम दो नए कर्मचारियों को भर्ती करना होगा, जबकि जिन प्रतिष्ठानों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं, उन्हें कम से कम पांच नई भर्ती करनी होंगी.

किस कर्मचारी को फायदा

वित्त मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत EPFO में रजिस्टर संस्थान में नियुक्त होने वाला हर वह नया कर्मचारी कवर होगा, जिसका मासिक वेतन 15,000 रुपये से कम है. उन्होंने बताया कि इसमें 15,000 से कम वेतन पाने वाले ऐसे EPF मेंबर भी शामिल होंगे, जिन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी से निकाल दिया गया था और वे एक अक्टूबर 2020 को या उसके बाद दोबारा नौकरी से जुड़े हैं.

ये घोषणाएं भी हुईं

वित्त मंत्री ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के 31 मार्च 2021 तक विस्तार की भी घोषणा की है. इस स्कीम में स्मॉल व माइक्रो एंटरप्राइजेज को फुली गारंटीड और कॉलेट्रल फ्री लोन मुहैया कराए जाते हैं. इसके अलावा उन्होंने संकटग्रस्त सेक्टर्स को सहयोग देने के लिए गारंटीड क्रेडिट स्कीम की भी घोषणा की. यह स्कीम 26 संकटग्रस्त सेक्टर्स और हेल्थकेयर सेक्टर में ऐसी एंटिटीज को कवर करेगी, जिनका क्रेडिट बकाया 29 फरवरी 2020 को 50 करोड़ रुपये तक या इससे ज्यादा दर्ज किया गया. इन एंटिटीज को बकाए का 20 फीसदी तक अतिरिक्त क्रेडिट के तौर पर दिया जाएगा. इस अतिरिक्त क्रेडिट को चुकाने की अवधि 5 साल होगी, जिसमें प्रिंसिपल रिपेमेंट पर 1 साल का मोरेटोरियम शामिल होगा. यह स्कीम 31 मार्च 2021 तक लागू है.

अर्थव्यवस्था में दिख रहा है सुधार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने योजना का एलान करते हुए बताया कि अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिल रही है. शेयर बाजार में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. बैंकों के क्रेडिट ग्रोथ में 5.1 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. अर्थव्यवस्था को लेकर RBI का अनुमान भी तीसरी तिमाही के लिए पॉजिटिव है. उन्होंने आत्मर्निभर भारत 1.0 के बारे बताते हुए उन्होंने कहा कि 28 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना के साथ आए हैं. पीएम स्वनिधि योजना के तहत 26.2 लाख लोन आवेदन किये गए है.

1.45 लाख करोड़ की PLI स्कीम

सरकार ने कोविड 19 से उबरने के लिए लगातार उपाय किए हैं, जिसमें मई में 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का एलान भी शामिल है. सरकार ने पहले ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 10 क्षेत्रों में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स स्कीम (PLI) का एलान किया है.  11 नवंबर को कैबिनेट की बैठक में 1.45 लाख करोड़ के प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स स्कीम पर मुहर लगी थी. इसमें फार्मा, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, टेलीकॉम और नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स, एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरीज, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट्स, सोलर मॉड्यूल्स, व्हाइट गुड्स और स्पेशियालिटी स्टील सेक्टर को फायदा होगा.

मई में 20 लाख करोड़ का राहत पैकेज

मई में सरकार ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का एलान किया था. इस पैकेज का फोकस तरलता बढ़ाने और छोटो कारोबारों को आसान ऋण उपलब्ध कराना था. लेकिन खर्च को बढ़ावा देने के लिए अधिक नहीं किया गया था. इस पैकेज में कोरोना से बुरी तरह प्रभावित सेक्टर जैसे टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन छूट गए थे. अब इन सेक्टर पर फोकस रह सकता है. बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से देशव्यापी लॉकडाउन लगा था, जिसके चलते अर्थव्यवस्था की ग्रोथ निगेटिव जोन में चली गई.